Friday, November 30, 2018

राहुल ने कहा- किसानों और युवाओं के लिए एक होना पड़ेगा

वामपंथी दलों की अगुआई में देशभर के 35 हजार किसान संसद भवन के सामने धरना देने पहुंचे। इतनी बड़ी रैली के दौरान प्रशासन ने महज 3500 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। किसान कर्जमाफी, फसलों के दाम में वृद्धि की मांग कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया और खेती पर संकट को लेकर संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की। धरने में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, राकांपा चीफ शरद पवार और लोकतांत्रिक जनता दल के शरद यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारुक अब्दुल्ला, माकपा नेता सीताराम येचुरी शामिल हुए।

राहुल गांधी ने कहा कि किसानों और युवाओं के लिए एक होना पड़ेगा। राहुल ने कहा, "देश का किसान आपके (मोदी के) दोस्त का अनिल अंबानी का विमान नहीं मांग रहा, वह सिर्फ अपना हक मांग रहा। आज हिंदुस्तान के सामने दो बड़े मुद्दे हैं, पहला किसाने के भविष्य का मुद्दा और दूसरा युवाओं के रोजगार का। इनके भविष्य के लिए जनता को अगर मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री को बदलना पड़े तो बदल दो।"

मोदी सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया
केजरीवाल ने कहा- मैं दिल्ली का मुख्यमंत्री हूं। इस नाते आप लोगों का दिल्ली में स्वागत है। आप बार-बार दिल्ली आइए। मुझे दुख इस बात का है कि आप दिल्ली दुख की घड़ी में आए हैं, दुखी होकर आए हैं। सरकार से नाराज होकर आए हैं। भाजपा ने पिछले चुनाव के पहले किसानों से जितने वादे किए थे, उन सारे वादों से मुकर गई। स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने का वादा किया था, 100 रुपए लागत पर 50 रुपए मुुनाफा देंगे। अब सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया कि स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू नहीं कर सकते।

'किसानों के हित में नीतियां बनाएंगे'

सीताराम येचुरी ने कहा, ''आज एक वैकल्पिक सरकार की जरूरत है। किसान मोदी सरकार को हटाएंगे और ऐसी सरकार लाएंगे, जो उनके हित में नीतियां बनाए। हम महाभारत के पांडवों की तरह मोदी सरकार को हराएंगे। कौरव 100 भाई थे, इनमें से दो के नाम ही लोग जानते हैं दुर्योधन और दुशासन। भाजपा भी कहती है कि हम इतनी बड़ी पार्टी हैं, लेकिन उनके बाकी नेताओं को कोई नहीं जानता। दुर्योधन और दुशासन की तरह मोदी-शाह का नाम ही चलता है।''

दर्शन में राकांपा चीफ शरद पवार और लोकतांत्रिक जनता दल के शरद यादव शामिल हुए। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारुक अब्दुल्ला, तृणमूल के दिनेश त्रिवेदी और अन्य नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है।

गुरुवार को निकाला था 26 किलोमीटर लंबा मार्च

किसानों ने गुरुवार को भी 26 किलोमीटर लंबा मार्च निकाला था। इसमें बिहार, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक आदि राज्यों किसान शामिल थे। इस दौरान स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव और मेधा पाटकर भी शामिल हुईं।

Wednesday, October 31, 2018

क्या चीन-पाकिस्तान की दोस्ती से केवल पंजाब को फ़ायदा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान दो से पांच नवंबर तक चीन के दौरे पर होंगे. जुलाई में प्रधानमंत्री बनने के बाद यह इमरान ख़ान का तीसरा विदेश दौरा होगा.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रीमियर ली केकियांग से मुलाक़ात करने के अलावा वह शंघाई में एक आयात मेले में भी शिरकत करेंगे. यहां से वह पाकिस्तान पर लगातार बढ़ रहे क़र्ज़ से राहत पाने के लिए चीन से ताज़ा निवेश लाने की कोशिश करेंगे.

इमरान ख़ान का दौरा उन हालात में हो रहा है जब चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को लेकर उनके देश में सवाल उठ रहे हैं. कहा जा रहा है कि इस योजना से केवल पाकिस्तान के सूबा पंजाब को फ़ायदा हो रहा है.

चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर या सीपेक चीन के महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत बनाए जा रहे व्यापारिक नेटवर्क का हिस्सा है.

सीपेक के तहत पाकिस्तान में इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई प्रॉजेक्ट चल रहे हैं, जिनमें चीन का 62 अरब डॉलर का निवेश है.

हालांकि इमरान ख़ान ने सीपेक का समर्थन किया है और चीन ने भी उम्मीद जताई है कि दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्ते प्रभावित नहीं होंगे.

चीन ने सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने 28 अक्तूबर को छपे एक संपादकीय में लिखा है, "चीन की परियोजनाओं पर बेवजह ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है और बेमतलब के सवाल उठाए जा रहे हैं क्योंकि बहुत से लोग अब भी चीन के उदय को स्वीकार नहीं कर पा रहे. मगर सीपेक के तहत चीन और पाकिस्तान के आपसी सहयोग से हासिल की गई कई उपलब्धियां साफ़ नज़र आ जाती हैं."

इसके एक दिन बाद ही चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा, "सीपेक के नतीजे फलदायी रहे हैं और हमारी दोस्ती गहरी हुई है."

इमरान ख़ान के कैबिनेट मंत्रियों और सलाहकारों की राय थी कि सरकार को देश में चल रहे सीपेक से जुड़े प्रॉजेक्टों की समीक्षा करनी चाहिए.

सबसे पहले वाणिज्य, कपड़ा, उद्योग और निवेश मंत्री अब्दुल रज़ाक दाऊद ने एक विदेशी चैनल को दिए इंटरव्यू में इस प्रॉजेक्ट को लेकर कुछ चिंताएं जताई थीं.

उन्होंने कहा था, "पिछली सरकार ने चीन के साथ सीपेक को लेकर सही से समझौते नहीं किए थे. उन्होंने न तो होमवर्क सही से किया और न ही मोलभाव सही से किया. उन्होंने बहुत कुछ ऐसे ही सौंप दिया."